अखिल भारतीय योग संस्थान कां योगिक कार्य
*अखिल भारतीय योग संस्थानकां योगिक कार्य*
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... नानाभाऊ माळी
*पूर्वार्ध*
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भारत संत, ऋषीं मुनीयों कि प्राचीन पावन भूमी हैं!भारतीय संस्कृती का इतिहास युगो युगोसें अतिपुरातन माना जाता हैं!यह प्राचीन इतिहास अनेकों पन्नोपर लिखा हुआ स्पष्टातसें दिखाई देता हैं!समृद्ध संस्कृती का वर्णन मन को लुभाता हैं!वही मानसचित्र हमारे मनपटलपर बैठा हुआ हैं!युगाभिलाषा चित्रण सहहृदयतासे सुनते,पढते आ रहे हैं!उस भव्य धराकां अतिविशाल इतिहास के साथ उसका भौगोलिक दायरा भी बढा था!विस्तृत विस्तार का नामोल्लेख प्राचीन ग्रंथोमें पाया जाता हैं!जैसे की इराण, अफगाणिस्तान, ब्रम्हदेश, भूतान, पाकिस्तान,नेपाल, बांगलादेश, श्रीलंका, इंडोनेशिया, मलेशिया, जैसे तटवर्ती एवंम पडोसी देशोकीं प्राचीन सभ्यता सर्वभाव सें एक ही थी!तत्कालीन विशालकाय संस्कृती का परिचालन हुआ करता था!प्राचीन सिंधूसभ्यता भारतीय संस्कृतीकां अविस्मरणीय अविष्कार परिवेश रहा हैं!
भारतीय सभ्यता एवं संस्कृती अनमोल धरोवर हैं!तदोपरांतं परिवर्तनशिल विकासकाल का प्रारंभ हुआ था!बदलावं का दौर शीघ्र गतीसे चलता रहा!परंतू संस्कृती रक्षकोंमें विचारोकीं मतभिन्नता पायी गयी थी!मत भिन्नता का दायरा बढता गया!तत्कालीन युगपुरुष अपनेही स्वतंत्र मार्ग अपनानें लगे थे!स्वतंत्र अनुयायों कें साथ मार्ग आसान करते रहे!अपनें खुद का समूह *धर्म और अध्यात्मिक धर्माचरण पूर्णतः भिन्न थे!* तब से लेकर उनके अनुयायी अपनें ही मार्गपर चलतें रहे!धर्माचरण कें भिन्न मार्ग पर चलते रहे!भिन्न मार्ग अपनानेसे उनके अनुयायी भिन्न समूह कें पानी में डुबकियाँ लगातें रहे!अलग से प्रवाहमें बहतें रहें!नयी नावपर बैठ गये थे!उसमे उठते उठते फिसलते, फसते गये!मत-विचारोंके कष्टप्रद परिवर्तन से प्राचीन सभ्यता बिखरती रही!मनुष्य कें दैवत एवम श्रद्धा विभिन्न छोटे छोटे टुकडोमें बटता, बिखरता गया,बहता चला गया!
छोटी अनेक नदियाँ विशाल नदीसे जा मिलती हैं! विशालकाय नदी सागर से जा मिलती हैं!और सागर अनेकों नदियोंकों अपनी गोदमें समा लेता हैं!अपने विशाल हृदयमें समानेंवाले महासागर किसी को छोटा,बडा नही सोचता!परंतू बदलावं कां दौर शुरु हो चुका था!
भरत भूमी गौरवशाली भूमी हैं!आदर्श आध्यत्मिक संहिता सें बनी इसीलिय सर्वश्रेष्ठ मानी जाती हैं!भारत श्रद्धा, शक्ती, विश्वास एवंम सिद्धी कीं जननी हैं!प्राचीन काल से हिंदुस्थान में आक्रमणकारी आते रहे!सभ्यसंस्कृती कों हानी पहुचातें रहे!दुष्ट हेतूसे निरंतर प्रयास करते रहे!भरत भूमीकों अनेकों टुकोडों में बाटने कां असफल प्रयास होता रहा!अपितु वें विफल रहें!कठीण पाषाण में श्रद्धा जो ढाली गयी थी!प्राचीन भरत भूमी कें लाखो मंदिर तोडकर, तहस नहस करनें कें उपरांत भी अटूट श्रद्धा बलसें उनके इरादे और प्रयास असफल रहे.हिंदुस्थान की पवित्र भूमी पर वेआक्रमकही कब्रिस्त होतें रहे!न टूटनेवाले कठीण पाषाण मंदिर अटूट रहे!यवन का आक्रमण विफल रहा, असफल रहा!आक्रमक खंडहरोमें तब्दील होतें गये!उनको यहीपर दफनाये गयां!अनेक शक्तियाँ एकत्रित होकर महानता कों विद्रुप करने में असफल रहे!श्रद्धाभाव नें अनेक मुश्किले आसान कर दि थी!पूरखोकी भूमी की मधुर गुंजन मीठहास बन कर रहे गयी!
*उत्तरार्ध*
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सुजलाम सुफलाम सस्य शामलामं... कां अध्यात्मिकता शुद्ध, पवित्र रूप मानव कल्याणकारी था और हैं!पूजनीय आत्मिक श्रद्धा कां हैं!यही विश्वास, श्रद्धा स्वास्थ्य कीं ओर अग्रेसर होती हैं!भारतीय प्राचीन ऋषी,मुनियों कीं इस भरतधरापर शुद्ध रुपसे संस्कृती कां सांस्कृतिक परिचालन होता रहा हैं!प्राचीन योगी,ऋषी, मुनियों कें निरंतर प्रयासो सें भारतीय अध्यात्म उत्थापन की ओर अग्रेसर होता जा रहा हैं! *योगा* भारतीय संस्कृती कां परिचयाक हैं!प्राचीन योगसाधना का नविनतम रूप दिखाई दे रहा हैं!साधकोमें योगाप्रती आस्था जाग रही हैं! हर एक व्यक्ती स्वास्थ्य कें प्रती सजग,जागरूक हो रहा!व्यक्ती कों प्राणायम व योगासनसें लाभ प्राप्त हो रहा हैं!योगा वैज्ञानिक आधार सें प्रमाणीत हो रहा हैं!इसलिए योगा कें प्रती लगाव बढ रहा हैं!मानसिक, शारीरिक सुदृढता कें लाभ मिल रहे हैं!योग शिक्षासें दवायों सें छुटकारा मिल रहा हैं!💐
भारतीय योगा संपूर्ण जगतमें प्रसारित हो हुआ!पश्चिमात्य जगतमें भारतीय योगसाधना कां विशेषरूपसे गौरव हो रहा हैं!योग आराधना का दैवी विस्तार हो रहा!संपूर्ण विश्वमें योगाद्वारा स्वास्थ्य कें प्रती सजग, आश्वस्त किया जा रहा!योगा भरत भूमी की अनमोल देणं हैं!जगतमें करोडो व्यक्ती योग साधनासें जुड रहे हैं!जो व्यक्ती योगा प्राणायाम कर रहा हैं उसे अच्छा खासा लाभ मिल रहा!भारत वर्ष में ही नहीं सारे विश्व में *अखिल भारतीय योग संस्थान* द्वारा व्यक्ती कें सुदृढ, स्वास्थ हेंतू *निशुल्क योगा केंद्र* कार्यरत हैं!निशुल्क योगा केंद्र परोपकारी भाव सें चलाये जा रहे हैं!
अब मानव उत्थान का केंद्र योगा बना रहा हैं!भारत में अनेको धर्म,पंत होते हुए केवल *योगासन और प्राणायाम* सें व्यक्ती कें जीवन में आनंद,स्वास्थ्य भर रहा हैं!हम परम भाग्यशाली हैं की योगा सें हमे लाभ मिला हैं.अनेकों बिमारीयों का इलाज योगासें हो रहा हैं!भारतीय योग संस्थान द्वारा मानव कल्याणकारी कार्य चल रहे हैं!यह प्राचीन सभ्यता का शिखर योगदान हैं!स्वास्थ्य लाभ सें आत्मविश्वास बढ रहा हैं!पुणे कें हडपसरस्थित अखिल भारतीय योगा संस्थान कें एक केंद्र *आण्णाभाऊ साठे विरंगुळा केंद्र* कों १५ वर्ष पूर्ण होनेपर २८ एप्रिल २०२६ कें पावन शुभदिन संस्था कें जिला, प्रांत प्रमुखोकें कर कमलोद्वारा स्थापना दिन मनाया गया. १५ वें सालगीरा हेतू आयोजित समारोहमें केंद्रप्रमुख आदरणीय श्री.प्रल्हाद देवघरे सर इन्होनें सभी सन्माननीय अतिथीगण का हृदयसें स्वागत किया.केंद्र कें १५ वर्ष हेतू अपने विचार रखे!'साधकों कों स्वास्थ्य लाभ मिल रहा हैं!' इसकी जाणकारी दी!जिल्हा प्रमुख आदरणीय इंजि.श्री.भगवानजी खेडकर सर द्वारा स्वास्थ्य हेतू अखिल भारतीय योग संस्थान का योगदान संबधी मार्गदर्शन प्राप्त हुआ!प्रांतअधिकारी आदरणीय श्री.संजयजी मराठे सर द्वारा उत्तम मार्गदर्शन प्राप्त हुआ!तदोउपरांत आदरणीय गवस मॅडम तथा प्रांत प्रधान गुरवर्य आदरणीय अशोकजी बसेरद्वारा अनमोल मार्गदर्शन का लाभ मिला!कर्णमधुर अनुभव कें मिठे बोल सुनते रहे!सभी प्रमुख अतिथी कें प्रती आदरभाव हृदयमे रखते हुए समारोह का समापन हुआ!समृद्ध अनुभव हमेशा हृदयकों नयी रोशनी देती रहती हैं!योगा सें मिलनेवाला लाभ मनो जीवन संजीवनी हैं!सभी योगसाधकों की कडी मेहनत सें समारोह का आनंद हमेशा यादगार रहेगा!
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... नानाभाऊ माली
हडपसर, पुणे-४११०२८
मो.नं-९९२३०७६५००
दिनांक-३० एप्रिल २०२६
nanabhaumali.blogspot.com
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